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ज्योतिष में भी हैं परीक्षा के लिए उपाय

शीर्षक पढ़कर चौकने की जरूरत नहीं कि भला ज्योतिष में जहां भाग्य रेखाएं और भविष्यकाल का लेखा-जोखा ढूंढा जाता है वहां पर भी ऐसा कुछ संभव है? यदि आप थोड़ा ठहर कर विचार करें तो आपको भी लगेगा कि ऐसा हो सकता है। यदि ग्रह नक्षत्र आदि हमारे जीवन पर अपना प्रभाव डाल सकते हैं तो वह हमारी बुद्धि, मन और विवेक को भी अवश्य ही प्रभावित कर सकते हैं। खास तौर पर शनि देव काफी प्रभावशाली हैं और कई विद्वानों द्वारा बताए गये नियमों से स्पष्ट है कि ज्योतिषानुसार शनि की साढ़ेसाती और ढैया भी पढ़ने में अरुचि पैदा कर देती है। अतः किसी ज्ञानी पंडित द्वारा विद्यार्थी की पत्री को पढ़वाकर उसके उपाय करना उचित रहता है। इसके लिए सरसों के तेल का छाया दान या शनि की वस्तुओं का दान लाभदायक होता है। शनि के मंत्रों का जप व शनि मंदिर के दर्शन मन को एकाग्रचित्त करते हैं। मन को एकाग्रचित्त करने के लिए प्राणायाम अत्यंत प्रभावशाली पाया गया है। इससे शरीर के अंदर की अशुद्ध वायु बाहर निकल जाती है और स्वच्छ वायु शरीर के स्नायुओं को पुनः क्रियान्वित व ऊर्जित कर देती है। इससे शरीर में शक्ति व स्फूर्ति पैदा होती है और मन एकाग्र हो जाता है। इसके लिए एक समय में केवल 5 से 10 बार सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया को पूरी करें। परीक्षाओं के समय 5 से 10 बार तक अपने पढ़ने के स्थान पर ही प्राणायाम कर लेना लाभदायक होता है। सरस्वती मां तो साक्षात विद्या की देवी ही हैं और उनकी कृपा ऐसे समय बहुत कुछ कर सकती है। सरस्वती यंत्र की स्थापना और सरस्वती मंत्र का जप भी परीक्षा में उत्तम अंक प्राप्त करने के लिए लाभप्रद है। यह मंत्र कुछ इस प्रकार से है ओम ऐं ह्रीं क्लीं सरस्वत्यै नमः । वैसे एक और मंत्र भी है और माता सरस्वती के इस मंत्र का जप विद्या प्राप्ति के लिए अत्यंत उत्तम है। यह मंत्र इस प्रकार है-या देवि सर्वभूतेषु विद्यारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः। वैसे कुछ विद्वानों का मानना है कि नित्य गायत्री मंत्र का जाप करना भी काफी लाभदायक है। लेकिन कुछ विद्वानों का मत है कि गायत्री मंत्र का जप रुद्राक्ष व स्फटिक मिश्रित माला पर जप करना श्रेयस्कर है। मंत्र इस प्रकार है ओम भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यम। भर्गो देवस्य धीमहि धियो योनः प्रचोदयात्। पढ़ाई में अच्छे अंक पाने के कुछ और उपाय जो ज्योतिषाचार्यों द्वारा बताए गये हैं- यह हैं सरस्वती मंत्र सहित सरस्वती लाॅकेट बुधवार को धारण करें। चार मुखी और छः मुखी रुद्राक्ष युक्त पन्ने का त्रिशक्ति कवच भी पढ़ाई में ध्यान केंद्रित करने में अत्यंत लाभदायक लाभप्रद है। इसके अलावा चूंकि बुधवार बुद्धि से संबंधित है तो प्रत्येक बुधवार को गणेश जी को लड्डूओं का भोग लगाएं व पढ़ाई के कमरे में मां सरस्वती का चित्र लगाकर रखें। पढ़ते समय अपना मुख पूर्व या ईशान की ओर रखें। इससे मन एकाग्र रहेगा। सोते समय अपने पैर उत्तर व सिर दक्षिण दिशा में रखें। इससे नींद गहरी आएगी और प्रातः काल ताजा व ऊर्जावान महसूस करेंगे। परीक्षा के लिये परीक्षा की तैयारी तो अवश्य करें लेकिन कितने अंक प्राप्त होंगे इस पर विचार नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे ध्यान भ्रमित होता है। दूसरे, हम यदि आने वाले अंकों पर विचार भी करेंगे तो इससे अंकों में बढ़ोतरी तो होगी नहीं, बल्कि ऐसी सोच के कारण मन न लगने से अंक कम अवश्य हो सकते हैं।

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