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तेरा क्या होगा इंडिया ?

पट्ठों को अपनी नाक से आगे कुछ दीखता ही नहीं है। किसान सिर्फ पानी मांग ही नहीं रहे हैं, बाकायदा उसके लिए मरने-मरवाने पर भी उतारू हैं।

देश का वाकई कुछ नहीं हो सकता है। पब्लिक ही कुछ ऐसी है-जिसे न व्यापे जगत गति। नरेन्द्र भाई पीएम की कुर्सी पर आए थे तो लगा था कि इस देश का भी कुछ होगा। योगी जी आए तब कुछ और भरोसा बढ़ा कि जरूर कुछ होगा। पर आखिर में रहे वही ढाक के तीन पात। यह किसानों का देश है, पर किसान ही सबसे ज्यादा कूप मंडूक बने हुए हैं। पट्ठों को अपनी नाक से आगे कुछ दीखता ही नहीं है। तभी सहारनपुर में, जी हां उसी सहारनपुर में किसान और वह भी देवबंद के इलाके के किसान, अपने खेतों के लिए गंगा लिंक नहर का पानी दिए जाने की मांग कर रहे हैं। और ये किसान सिर्फ पानी मांग ही नहीं रहे हैं, बाकायदा उसके लिए मरने-मरवाने पर भी उतारू हैं। भाई लोगों ने सरकार को बाकायदा अल्टीमेटम ही दे दिया है। गंगा लिंक नहर से पानी दो, वर्ना लखनऊ में विधान सभा के सामने किसान आत्मदाह कर लेंगे। यानी और कुछ नहीं भी तो बेचारी सरकार के तीन साल के जन का सगुन बिगाडने का इंतजाम तो हो ही गया है। सहारनपुर में क्या कुछ नहीं हो रहा है। जब से योगी जी की सरकार आई है, सब कुछ सहारनपुर में ही तो तो रहा है। सहारनपुर में अम्बेडकर की मूर्ति लगाने से रोका जा रहा है। उसी सहारनपुर में जबर्दस्ती अम्बेडकर का जन्म दिन जुलूस निकालकर मनाने के नाम पर मुसलमानों को ठोका जा रहा है। फिर उसी सहारनपुर में राणाप्रताप की मूर्ति की मजबूती से स्थापना करने के लिए दलितों के घरों को फूंका जा रहा है। आखिर में उसी सहारनपुर में जल्से-जुलूस की कोशिश कर रहे दलितों को पुलिस की लाठियों से पीटा जा रहा है। और उसी सहारनपुर में किसानों को सिर्फ अपने खेतों के लिए पानी की पड़ी है। उन्हें अम्बेडकर का अपमान दिखाई नहीं दे रहा है। उन्हें महाराणा प्रताप का सम्मान भी दिखाई नहीं दे रहा है। देवबंद में बैठकर भी उन्हें उसका नाम बदलकर देवबृंद करने का अभियान तक दिखाई नहीं दे रहा है। जेएनयू वाले एंटीनेशनलों की तरह इन्हें भी सिर्फ आजादी चाहिए-खेतों के सूखने से आजादी! वाकई तीन साल में कुछ नहीं हो पाया। अब तेरा क्या होगा रे इंडिया!

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