778 views

आँसू रोक सको तो जानें, पढ़ें बाल कथा : बुलेट ट्रेन

रोमाँचक कहानी

साधारण आदमी के लिए ट्रेनों में सफर आज भी कितना कष्टकारी है, इसे दर्शाने के लिए सोशल मीडिया की एक कहानी ‘बुलेट ट्रेन’ हम यहां प्रकाशित कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अहमदाबाद से मुंबई तक एक अति महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन चलाने का वादा किया था। देश में अभी जो ट्रेने चल रही हैं, उनमें साधारण दर्जे में सफर करने वालों को बैठने की जगह तो दूर खड़े होने का स्थान भी नहीं मिलता है। परिवार के साथ यदि कोई सफर करना चाहता है तो उसके लिए रिजर्वेशन कराने के अलावा और कोई चारा नहीं रहता है। ट्रेनों में सामान्य दर्जे के डिब्बे बढ़ाए जाएं और सभी लोगों को आसानी से ट्रेन यात्रा करने का अवसर मिले, रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने रेल बजट प्रस्तुत करते हुए वादा भी किया था। अगला रेलबजट प्रस्तुत करने का समय आ गया है लेकिन ट्रेनों में गरीबों को यात्रा करने में अब भी उतनी ही कठिनाई हो रही है जितनी पूर्ववर्ती सरकार के समय हो रही थी। इसी बात के मद्देनजर प्रस्तुत है सच्चाई को छूती यह कहानी-
जैसे ही ट्रेन रवाना होने को हुई, एक औरत और उस का पति एक ट्रंक लिए डिब्बे में घुस पडे़। दरवाजे के पास ही औरत तो बैठ गई पर आदमी चिंतातुर खड़ा था। जानता था कि उसके पास जनरल टिकट है और ये रिजर्वेशन डिब्बा है। टीसी को टिकट दिखाते उसने हाथ जोड़ दिए।
– ये जनरल टिकट है। अगले स्टेशन पर जनरल डिब्बे में चले जाना। वरना आठ सौ की रसीद बनेगी। कह टीसी आगे चला गया।
पति-पत्नी दोनों बेटी को पहला बेटा होने पर उसे देखने जा रहे थे। सेठ ने बड़ी मुश्किल से दो दिन की छुट्टी और सात सौ रुपये एडवांस दिए थे। बीबी व लोहे की पेटी के साथ जनरल बोगी में बहुत कोशिश की पर घुस नहीं पाए थे। लाचार हो स्लिपर क्लास में आ गए थे।
– साब, बीबी और सामान के साथ जनरल डिब्बे में चढ़ नहीं सकते। हम यहीं कोने में खड़े रहेंगे। बड़ी मेहरबानी होगी। टीसी की ओर सौ का नोट बढ़ाते हुए कहा।
-सौ में कुछ नहीं होता। आठ सौ निकालो वरना उतर जाओ।
Û आठ सौ तो गुड्डो की डिलिवरी में भी नहीं लगे साब। नाती को देखने जा रहे हैं। गरीब लोग हैं, जाने दो न साब। अब कि बार पत्नी ने कहा।
-तो फिर ऐसा करो, चार सौ निकालो। एक की रसीद बना देता हूँ, दोनों बैठे रहो।
-ये लो साब, रसीद रहने दो। दो सौ रुपये बढ़ाते हुए आदमी बोला।
-नहीं-नहीं रसीद तो बनानी ही पड़ेगी। देश में बुलेट ट्रेन जो आ रही है। एक लाख करोड़ का खर्च है। कहाँ से आयेगा इतना पैसा? रसीद बना-बना कर ही तो जमा करना है। ऊपर से आर्डर है। रसीद तो बनेगी ही। चलो, जल्दी चार सौ निकालो वरना स्टेशन आ रहा है, उतर कर जनरल बोगी में चले जाओ। इस बार कुछ डांटते हुए टीसी बोला।
आदमी ने चार सौ रुपए ऐसे दिए मानो अपना कलेजा निकाल कर दे रहा हो।
-पास ही खड़े दो यात्री बतिया रहे थे। ये बुलेट ट्रेन क्या बला है?
-बला नहीं जादू है जादू। बिना पासपोर्ट के जापान की सैर। जमीन पर चलने वाला हवाई जहाज है, और इसका किराया भी हवाई सफर के बराबर होगा, बिना रिजर्वेशन उसे देख भी लो तो चालान हो जाएगा। एक लाख करोड़ का प्रोजेक्ट है। राजा हरिश्चंद्र को भी ठेका मिले तो बिना एक पैसा खाये खाते में करोड़ों जमा हो जाएं।
-सुना है, अच्छे दिन इसी ट्रेन में बैठकर आनेवाले हैं। उनकी इन बातों पर आस पास के लोग मजा ले रहे थे। मगर वे दोनों पति-पत्नी उदास रुआंसे ऐसे बैठे थे मानो नाती के पैदा होने पर नहीं उसके शोक में जा रहे हों। कैसे एडजस्ट करेंगे ये चार सौ रुपए? क्या वापसी की टिकट के लिए समधी से पैसे मांगना होगा?
-नहीं-नहीं।
-आखिर में पति बोला- सौ- डेढ़ सौ तो मैं ज्यादा लाया ही था। गुड्डी के घर पैदल ही चलेंगे। शाम को खाना नहीं खायेंगे। दो सौ तो एडजस्ट हो गए। और हाँ, आते वक्त पैसिंजर से आयेंगे। सौ रूपए बचेंगे। एक दिन जरूर ज्यादा लगेगा। सेठ भी चिल्लायेगा। मगर मुन्ने के लिए सब सह लूंगा। मगर फिर भी ये तो तीन सौ ही हुए।
-ऐसा करते हैं, नाना-नानी की तरफ से जो हम सौ-सौ देनेवाले थे न, अब दोनों मिलकर सौ देंगे। हम अलग थोड़े ही हैं। हो गए न चार सौ एडजस्ट। पत्नी ने रुंधे गले से पूछा, मगर मुन्ने के पैसे कम करना… और पति की आँख छलक पड़ी।
-मन क्यूँ भारी करते हो जी। गुड्डी जब मुन्ना को लेकर घर आयेगी तब दो सौ ज्यादा दे देंगे। कहते हुए उसकी आँख भी छलक उठी।
फिर आँख पोंछते हुए बोली- अगर मुझे कहीं मोदीजी मिले तो कहूंगी- इतने पैसों की बुलेट ट्रेन चलाने के बजाय, इतने पैसों से हर ट्रेन में चार-चार जनरल बोगी लगा दो, जिससे न तो हम जैसों को टिकट होते हुए भी जलील होना पड़े और ना ही हमारे मुन्ने के सौ रुपये कम हो। उसकी आँख फिर छलक पड़ी।
-अरी पगली, हम गरीब आदमी हैं, हमें मोदी जी को वोट देने का तो अधिकार है, पर सलाह देने का नहीं। रो मत।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!