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हरिद्वार की गंगा का पानी पीने तो दूर, नहाने लायक भी नहीं है : सरकार

हरिद्वार। पिछले 3 सालों में 2958 करोड़ रूपए गंगा की सफाई पर खर्च हो चुके हैं लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब सरकार खुद ही इस बात को तस्दीक कर रही है कि हरिद्वार की गंगा का पानी बुरी तरह प्रदूषित है। यहां तक कि हरिद्वार में भी गंगा का पानी नहाने लायक नहीं है।

एक आरटीआई के जवाब में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने बताया है कि हरिद्वार में गंगा नदी का पानी नहाने के लिए भी ठीक नहीं है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, हरिद्वार के 20 घाटों में रोजाना 50,000 से 1 लाख श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं। उत्तराखंड में गंगोत्री से ले कर हरिद्वार तक के 294 किलोमीटर के इलाके में से 11 लोकेशंस से गंगा के पानी के सैंपल लिए गए और उनकी गुणवत्ता जांचने पर यह सामने आया है कि हरिद्वार के पास के इलाकों के गंगा के पानी में BOD, कॉलिफॉर्म और अन्य जहरीले तत्व पाए गए।

हरिद्वार की गंगा का पानी पीने तो दूर, नहाने लायक भी नहीं है : सरकार

CPCB के मानकों के अनुसार, नहाने के 1 लीटर पानी में BOD, का स्तर 3 mg से कम होना चाहिए, जबकि यहां के पानी में यह स्तर 6.4mg से ज्यादा पाया गया। इसके अलावा, हर की पौड़ी के प्रमुख घाटों समेत कई जगहों के पानी में कॉलिफॉर्म भी ज्यादा मात्रा में पाया गया। प्रति 100उस पानी में कॉलिफॉर्म की मात्रा जहां 90 MPN  (मोस्ट प्रॉबेबल नंबर) होना चाहिए, वह 1,600 MPN तक पाई गई। CPCBकी रिपोर्ट के मुताबिक नहाने के पानी में इसकी मात्रा प्रति 100 ml में 500 MPN या इससे कम होनी चाहिए।

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इससे पहले भी NGT ने सरकार कि खिंचाई करते हुए कहा था कि जनता का पैसा बर्बाद किया जा रहा है जबकि आज तक गंगा की एक बूँद भी साफ नहीं हुई है।

5 साल में होने हैं 20,000 करोड़ खर्च

सरकार ने गंगा को स्वच्छ करने के लिए नमामि गंगे प्रोजेक्ट पर अगले 5 सालों में 20,000 करोड़ रूपए खर्च करने का लक्ष्य रखा था, जिसमें से अबतक 2958 करोड़ रूपए खर्च हो चुके हैं यह बताया जा रहा है।

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