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हिमाचल में भाजपा के भविष्य पर छाया अंधियारा

कांग्रेस की खिली बांछे, सहानुभूति व विभीषण होंगे अचूक अस्त्र-शस्त्र

पांवटा साहिब। आज की सुबह एक दैनिक अखबार में प्रकाशित एक खबर ने हिमाचल की राजनीत में सनसनी फैलाने के साथ-साथ प्रदेश भाजपा एवं उनके सच्चे समर्थकों को हताशा की गर्त में जबरन धकेल गया जिसकी कल्पना किसी ने कभी भी नहीं की थी। कुलमिलाकर इस सनसनी वाली खबर के प्रकाशन के पश्चात समूचे हिमाचल में राजनीतिक पारा चरम पर पहुंचने के अलावा, देखते ही देखते हिमाचल भाजपा उपरोक्त ग्राफिक की तर्ज पर दो-फाड हो गई।
विविद हो कि जिस प्रकार किसी भी घटना के घटने का कोई न कोई मोटिव होता है और चोर चाहे जितना शातिर ही क्यों न हो कोई न कोई सुराग छोड़ ही जाता है उसी प्रकार आइये अब आप और हम उक्त शाॅकिंग न्यूज के मोटिव और सुराग की तलाश करने का एक छोटा सा प्रयास करते हैंः-
आज की घटना की पहली खामी यह है कि पूरी खबर कयासों के ऊपर मढ़ी गई है तथा खबर पर कोई भी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
दूसरा यह कि खबर का शीर्षक ”….दांव खेलेगी भाजपा“ बहुत ही घटिया और निराशावादी शीर्षक है यानि दांव वहीं खेला जाता है जहाँ जीत की उम्मीद न हो। तो क्या भाजपा का शीर्षस्थ नेतृत्व इतना कमजोर हो गया है बड़े-बड़े किले फतह करने के पश्चात अब उसके कंधे की आड लेकर दांव जैसे जुमले दागे जाएंगे? शायद कतई नहीं। अतः प्रथम दृष्टया यह मन गढ़न्त या फिर किसी के इशारे पर ऐसा घटिया दांव खेलने का प्रयास किया गया है क्योंकि अन्य सभी प्रतिष्ठित समाचार इस खबर से अनभिज्ञ हैं।
तीसरी बात यह कि, खबर में इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि ”पार्टी नेतृत्व जून महीने के अंतिम हफ्ते में इस राज्य में भी मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार तय कर देगा।“ यानि यह निर्णायक पंक्ति है परन्तु इसकी आधिकारिक पुष्टी नदारत है। यानि सोची समझी रणनीति के तहत शब्दों की व्यूह रचना की गई है।
चौथा, ”हालांकि पार्टी नेतृत्व ने पहले ही केन्द्रीय स्वास्थ मंत्री जेपी नड्डा को चेहरा के रूप में पेश का मन बना लिया है“ यह बात भी आधिकारिक तौर पर किसी ने नहीं कही है। कुलमिनाकर उम्मीद का सहारा लेकर पूरे हिमाचल की भाजपा में उथल-पुथल करने का जबरजस्त घृणित प्रयास किया गया है जिस वजह से हिमाचल की सत्ता के नजदीक खड़ी भाजपा को सत्ता से हाथ भी धोना पड सकता है। इस खबर से यदि कोई बेहद खुश है और किसी की बांछे खिली हैं, तो वह है; हिमाचल कांग्रेस, जो वीरभद्र सिंह के सहानुभूति कार्ड के अलावा भाजपा के विभीषणों को जोड़कर हिमाचल में कांग्रेस रिपीट का मिशन फतह करके भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व की नाक कतरने में जरा भी देर न लगायेगी।
पांचवी और अंतिम 100 टके की खरी-खरी बात यह है कि यदि यह खेल भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व (मोदी/शाह) द्वारा खेला जा रहा है तो यह निश्चित मान लिया जाएगा कि जीत पर जीत के बाद वह बावली हो गयी है और अहंकारी भी? यदि ऐसा है तो, हिमाचल में जो अबतक नहीं हुआ है वह होगा और परिणाम के तौर पर प्रदेश में तीसरे शक्तिशाली विकल्प का उदय होना निश्चित है। यदि यह सब बकवास है और किसी की शरारत या साजिश है या फिर महौल बनाने का एक घटिया प्रयास है तो भाजपा हाईकमान को इस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए क्योंकि इस मामले में वह जितना विलम्ब करेगी घाव उतना ही गहरा और ला-ईलाज होगा।

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