भाजपाई रंग में पूरी तरह से रंग मेें गया पौण्टा साहिब, हजारों समर्थकों के संग चौधरी सुखराम ने दाखिल किया नामांकन पत्र

इस बार टक्कर नहीं, सिर्फ मार्जिन पर है लड़ाई; टिकट बंटवारे के बाद पौण्टा कांगे्रस हुई खण्ड-खण्ड

पौण्टा साहिब। जिला सिरमौर के भाजपा अध्यक्ष एवं पूर्व सीपीएस चौधरी सुखराम ने अपने भारी हुजूम के साथ पांवटा विस क्षेत्र के निर्वाचन अधिकारी के समक्ष बतौर भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवार पर्चा भरा। श्री चौधरी द्वारा आज पार्टी की ओर से नामांकन दाखिल करने के बाद क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार हेतु काफी समय से मची उथल.पुथल भी तालाब के पानी की तर्ज पर शांत हो गया है।
पाठकों को बता दें कि आज हजारों भाजपा समर्थकों के साथ चौधरी सुखराम ने शक्ति प्रदर्शन के साथ भाजपा मुख्य चुनाव कार्यालय से पौण्टा मेन बाजार का एक फेरा मारते हुए अपना नामांकन निर्वाचन अधिकारी के समक्ष पेश किया। इस दौरान नगर में जगह.जगह पर उनके सैकड़ों समर्थकों ने फूल.मालाएं पहनाकर एवं पटाखें बजाकर उनका तहेदिल से स्वागत किया। आज अपने समर्थन में जुटी हजारों की भीड़ देखकर भाजपा उम्मीदवार चौधरी सुखराम भी गदगद हो उठे। कुलमिलाकर आज भीड़ इस कदर बेताब और उत्तेजित थी कि पूरा पौण्टा भाजपाई रंग में रंगा नजर आया। गौरतलब हो कि इस शक्ति प्रदर्शन के दौरान ऐसे चेहरों की भी अच्छी खासी तादात देखने को मिली जो पहले कांग्रेस और निर्दलीय के नाव में सवार थे।

इससे पूर्व दीवाली पर पूरे दिन और रात्रि 2 बजे तक चौधरी सुखराम रूठों के घर खुद चलकर गए और दीवाली की बधाई देते हुए जीत का आर्शीवाद भी लिया। इस दौरान तकरीबन सभी रूठे हुए लोगों ने उन्हें आश्वस्त किया कि वे निर्भय होकर नामांकन दाखिल करें सभी लोग उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे।
काबिलेजिक्र बात यह है कि चौधरी सुखराम द्वारा आज नामांकन पत्र भरने के उपरांत क्षेत्र में इस बात की चर्चा ने जोर पकड़ ली है कि इस बार उनके मुकाबले में कोई नहीं है अपितु सिर्फ मार्जिन की लड़ाई शेष है। क्योंकि कांग्रेस हाईकमान ने टिकट आबंटन के दौरान पांवटा के सच्चे एवं विश्वसनीय कार्यकर्ताओं की उपेक्षा करते हुए पार्टी से बगावत करने वाले को टिकट थमा दिया है जिससे पार्टी, संगठन तथा कार्यकर्ता भी खुश नहीं है। कांगे्रस और भाजपा के टिकट तय होने के बाद लोग खुलकर यह कहने लगे हैं कि कांग्रेस ने टिकट का गलत फैसला करके पांवटा की सीट बतौर दीवाली गिफ्ट भाजपा को सौंप दी है। यहाँ सवाल अब हार-जीत के बजाय सिर्फ मार्जिन का रह गया है कि इस बार चौधरी सुखराम कितनी मार्जिन से अपने निकटम प्रतिद्वंदी किरनेश जंग को परास्त करते हैं। चुनावी पंडितों की माने तो इस बार चौधरी सुखराम रिकार्ड मतों से जीतकर इतिहास रचने वाले हैं।

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