भगवानपुर वाले करते हैं राजनीति, वादा किया है 5 साला चुनावी, लोग कम पियें पानीः सुखराम

अल्पसंख्यक अध्यक्ष ने मुंह पर ही दिया विधायक को जवाब
पांवटा साहिब। बीते सप्ताह हिम उजाला द्वारा प्रकाशित हुए एक पोस्ट के पश्चात आखिर विधायक सुखराम को पत्रकारों का मुंह बंद करने की सुध आ ही गई फलस्वरूप उन्होंने भोजन की आड़ में अपने महान विकासकार्यों के उल्लेख हेतु सभी को आमंत्रण भेज दिया और पत्रकारों के तीखे सवालों के दौरान उन्होंने भगवानपुर वालों पर राजनीति करने का तोहमत लगाते हुए किए गए वादों को चुनावी तर्ज पर 5 साला करार दे दिया। पत्रकारों को हैरानी तो तब हुई जब उन्होंने पेयजल की किल्लत पर यह टिप्पणी कर दी कि ”अब तो सरकार ने एक अलग विभाग बना दिया है जो लोगों को पानी कम खर्च करने की नसीहत देता है।“ शायद विधायक लोगों को यही संकेत देना चाहते हैं कि लोग पानी कम पियें। 
आज लोक निर्माण विभाग के वीआईपी विश्राम गृह में चौधरी सुखराम ने आज विश्व के लोकप्रिय नेता तथा भारत के प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन पर मोदी-2 की 100 दिनों की उपलब्धियों का बखान किया तथा बीच में विधायक महोदय ने अपनी उपलब्धियाँ घुसेड़ते हुए उनका भी खाका खींचा। परन्तु उनकी बात समाप्त होते ही पौने दो साल से घात लगाए पत्रकारों ने उनसे तीखे सवाल दागने शुरू कर दिये, जिसमें क्षेत्र की सड़कों की दयनीय हालत, बीमार सरकारी अस्पताल की दुर्दशा, यमुनाघाट पर लगातार होती मौतें, नाराज चल रहे पार्षद, बाल्मीकि बस्ती का गंदा नाला, अवैध खनन, ओवरलोडिंग से टूटती सड़कें और राजस्व को लगने वाले चूने, तथा पेयजल समस्या का जवाब देते-देते विधायक महोदय जरा गुस्से से भी भर गए क्योंकि उन्हें पत्रकारों से ऐसे तीखे सवालों की तनिक भी उम्मीद नहीं थी क्योंकि उन्होंने उनके लिए लजीज भोजन के इंतजामात जो कर रखे थे।
पत्रकारवार्ता के दौरान विधायक जी ने पूर्व विधायक किरनेश जंग के 5 सालों को कोसते हुए उस समय के विकास के मरणासन्न अवस्था की भरपूर ब्याखा पर अपने पौने दो साल के कार्यक्रम को स्वर्णिम करार दिया। परन्तु जब पेयजल समस्या बारे हिम उजाला द्वारा भगवानपुर का एक उदाहरण पेश किया गया कि हाल ही में पूर्व विधायक किरनेश जंग के इशारे पर पानी की पाईपें बिछाई जा रही थी लेकिन भाजपा समर्थकों को एक-एक पाईप के लिए मुंह ताकना पड़ा। इस पर विधायक सुखराम ने सफाई दी कि यह योजना पिछली सरकार के समय स्वीकृत हुई थी यानि उन्होंने माना कि पिछली सरकार के काम—काज आज भी हो और चल रहे हैं! उन्होंने पत्रकारों का माइंड वॉश करने के उद्देश्य से यह भी कहा कि भगवानपुर वाले जिस तरह की राजनीति करते हैं यह आप लोगों को पता नहीं है। विधायक जी के इतना कहते ही वहां बैठे भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष नसीम नाॅज ने उन्हें तुरन्त आड़े हाथों लेते हुए साफ लब्जों में चेताया कि भगवानपुर वालों को आप गलत बदनाम कर रहे हैं कहकर वार्ता को गर्म कर दिया। कुलमिलाकर पत्रकारों के तीखे सवालों का जवाब देते-देते विधायक महोदय का मूड आॅफ हो चुका था और उनका तवा काफी गर्म हो गया था इसी गर्मा-गर्मी में पेयजल की समस्या सुलझाने के बजाय वे यह भी बोल बैठे कि ”अब तो सरकार ने एक अलग विभाग बना दिया है जो लोगों को पानी कम खर्च करने की नसीहत देता है।“ यानि लोग कम पानी पियें। पीछे बैठे एक दाड़ीवाले पत्रकार ने चुटकी ली कि भाई विधायक जी से पानी मांगना बंद कर दे। बोतल अपने आप हस्पताल में चढ़ जायेगी। 
इसके पूर्व पत्रकारों ने नगर पार्षदों की असंतुष्टता, नदी-नालों पर हो रहे अवैध खनन, ओवरलोड़ से टूटती सड़कें, ओवरलोड खनन ढुलाई से राजस्व के नुकसान, सिविल अस्पताल की खस्ताहाल हालत, बाल्मीकि बस्ती का चुनावी नाला, क्षेत्र की हर कोने की खस्ताहाल सड़कों के बारे प्रश्न पूछ-पूछ कर विधायक महोदय के पौने दो साल के स्वर्णिम विकास की बखिया उधेड़ दी।

सनद रहे कि हिम उजाला सर्वे के मुताबिक विधायक महोदय से आजकल काफी समर्थक बेहद नाराज चल रहे हैं इस बारे हिम उजाला द्वारा खबर प्रकाशित करने के बाद हैरतअंगेज यह खुलासा हुआ कि नाराज लोगों का आंकड़ा काफी बड़ा है। हिम उजाला ने इस बारे करीब 43 लोगों का वर्जन लिया है जो सिर्फ सुखराम से खफा हैं, भाजपा और नरेन्द्र मोदी से नहीं। अतः पांवटा भाजपा के अदंर ही भविष्य के नये नेता की तलाश अभी से शुरू हो चुकी है। एक सर्वे के मुताबिक यदि आज विस चुनाव हो जाएं तो सुखराम अपनी लीड़ से हाथ धो चुकें हैं। यदि वे समय रहते नहीं चेते तो भविष्य में पार्टी की ओर से किए जाने वाले सर्वे में उनका पत्ता कटने में तनिक भी देर नहीं लगेगी क्योंकि

मोदी सरकार में बैड परफाॅरमेन्स को कोई तवज्जो नहीं दी जाती और इतिहास इसका गवाह भी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!